Tuesday, February 12, 2019

कहो तुम



छोड़ दो हमे अगर हो गए हो बेज़ार तुम
हम नहीं कहते बनके रहो गले का हार तुम ।



आओ चलो पैदल मिलो तक जाना है तुम्हे
के आगे किसी मोड़ पर शायद सवार हो जाओ तुम 



कब तक आखिर ज़माने से डरके छुपते फिरोगे
आशिक़ हो ना तो कर दो ना इज़्हार तुम 



वैसे तो नही मेरे पास कोई ज़र या ज़मीन कोई
एक दिल है छोटा सा बन जाओ उसके मुख्तार तुम ।



इश्क़ से पहले सुना था बहुत काम के थे "नवाब"
मुहब्बत मे पड़के हो गए ना बेकार तुम ।



कहा था मत करो एसी मुहब्बत टूट कर शिद्दत वाली
नहीं सुने अब बताओ हो गए ना बेख्तियार तुम ।



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2 comments:

। ढूंढता हूं । Dhoondta Hu।

लिखने  को मैं आज कोई उन्वान ढूंढता हूं कलम में अपनी खुदा का फैज़ान ढूंढता हूं। Likhne ko mai aaj koi unvaan dhoondta hu Kalam me apni khuda ...