Friday, June 21, 2019

शख्सियत मेरी


शख्सियत  मेरी


मैं सिफर से शिखर तक उभर कर दिखाऊंगा
मैं शम्स बनके तन्हा आसमां पर छा जाऊंगा

Mai sifar se shikar tak ubhar kar dikhaaunga
Mai shams banke tanha asmaan pe cha jaunga


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बंदिशें लगा ले मुझ पर जो रोकने की ज़िद्द हो तो
मैं तो दरिया हूं फिर बेहकर उस पार हो जाऊंगा

Bandishe laga le mujhper rokne ki zidd ho to
Mai to dariya hu fir behkar us paar ho jaaunga


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मैं हवा हूं पगले मुझे कैसे रोकेगा भला कोई
मैं तो ख़ुशबू हूं, मैं रेशे रेशे में समा जाऊंगा 

Mai hawa hu pagle mujhe kaise rokega bhala koi
Mai to khushboo hu, Mai Reshe Reshe me sama jaaunga



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समझता है कि मुझे जला कर खत्म कर देगा अगर
अरे मैं राख़ बनके विभूति सा माथे पर चढ जाऊंगा

Samajhta hai ki mujhe jala kar khatm kar dega Agar
Areh Mai raakh banke vibhooti sa maathe per chad jaaunga



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मिटाना इतना भी आसान नहीं हैसियत मेरी ज़माने से
मैं आशिक हूं "नवाब" अपनी छाप यहां छोड़ जाऊंगा

Mitana itna bhi asaan nahi haisiyat meri zamane se
Mai Aashik hu "Nawab" apni chaap yaha chod jaaunga


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Sunday, March 24, 2019

ऐसा तो नहीं


मैं मौजूद तो हूँ मगर तेरे पास नहीं
तेरी चाहत हूँ मगर तुझे एहसास नही


तुझे लगता है जो ज़माने से अज़ीज़
जान ले वो यहाँ कुछ खास नही


भले तोड़ा हो दिल तूने हजारों बार
खुदा कसम मैं तुझसे नाराज़ नहीं


कितना भी कर बखान अपनी शिद्दतो का
अब इस दिल को अय्तेमद -ए- रास नहीं


कहता था मर जाऊँगा एक पल की दूरी में
जुदाई को हो गए अर्से तू उदास भी नहीं


लगा लिया अब हमने उम्मीद पत्थर से
मगर तेरी कसम तुझसे कोई आस नहीं


बड़ा बेगैरत है ये दिल मेरा "नवाब" देख ज़रा
टूटा के तार तार है मगर अब भी नासाज़ नहीं।



Friday, March 1, 2019

बताऊं क्या क्या

यूं ही बैठे बैठे अचानक कुछ ख्याल आए लगा जैसे कोई दिल के दरवाजे पर दस्तक देकर कह रहा हो "क्यों बेचैन हो, क्या हुआ है?  भारी है आज तो लिखो ना" और फिर ख़यालो में डूबे ये लिखा के 
'बताऊं क्या क्या'

कहना है के......

इस छोटे से दिल को समझाऊं क्या क्या
इतने सवालों के जवाब तुम्हें बताऊं क्या क्या

कभी महसूस कर लो खुद भी एहसासों को
चुप क्यों हैं जज्बात  तुम्हें बताऊं क्या क्या

ये इश्क़ भी ना बड़ा ही अजीबो - गरीब है यार 
कितना है आज़ाब ये तुम्हें बताऊं क्या क्या

लफ़्ज़ों में समझाना हो तो बहुत आसान होता
इन आंखो के इशारों से तुम्हें बताऊं क्या क्या

जानना हो के चीज़ है समंदर कितनी हसीन
कूदो, देखो, किनारों से तुम्हें बताऊं क्या क्या

खूबसूरत है रंग आसमानों का देखना उड़कर
यहां ज़मीन से बैठे बैठे तुम्हें बताऊं क्या क्या

मैं कितना अधूरा या मुकम्मल जानना है ना तुम्हें
पढ़ने की करो कोशिशें राज तुम्हें बताऊं क्या क्या

दूर से जो पूछोगे तो हाल अच्छा ही पाओगे "नवाब"
आओ नज़दीक, फासलों से तुम्हें बताऊं क्या क्या ।


अलग अलग एहसासों को इकट्ठा करके दिल के जज्बातों से होते हुए छोटी सी शिकायत पर ख़तम, इस कलाम के बारे में आपकी राय ज़रूर दीजिए। आपकी टिप्पणी बहुत मायने रखती है और नाचीज़ को हौंसला देती है ।
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Tuesday, February 12, 2019

कहो तुम



छोड़ दो हमे अगर हो गए हो बेज़ार तुम
हम नहीं कहते बनके रहो गले का हार तुम ।



आओ चलो पैदल मिलो तक जाना है तुम्हे
के आगे किसी मोड़ पर शायद सवार हो जाओ तुम 



कब तक आखिर ज़माने से डरके छुपते फिरोगे
आशिक़ हो ना तो कर दो ना इज़्हार तुम 



वैसे तो नही मेरे पास कोई ज़र या ज़मीन कोई
एक दिल है छोटा सा बन जाओ उसके मुख्तार तुम ।



इश्क़ से पहले सुना था बहुत काम के थे "नवाब"
मुहब्बत मे पड़के हो गए ना बेकार तुम ।



कहा था मत करो एसी मुहब्बत टूट कर शिद्दत वाली
नहीं सुने अब बताओ हो गए ना बेख्तियार तुम ।



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Sunday, February 10, 2019

लगता है

लगता है हो गई गलती सब कुछ बता कर तुझे
मेरे टूटे दिल के हर वरक दिखा कर तुझे


ना किया था इज़हार जब तक सब ठीक ही तो था
हालात बदल से गए अब, जता कर तुझे

मै भूखा भी रहा तो भी दिल शादाब रहा मेरा
अपनी रोटियां वो सब खिला कर तुझे


करता था याद तुझे वो शब तक सहर से
रातभर जागता था वो सुला कर तुझे

सोचता है दिल बदल देगा अपनी शिद्दत से "नवाब"
अफ़सोस है मगर अब, ये सब बता कर तुझे



@im_nawab_khan
नवाब खान की कलम से।

। ढूंढता हूं । Dhoondta Hu।

लिखने  को मैं आज कोई उन्वान ढूंढता हूं कलम में अपनी खुदा का फैज़ान ढूंढता हूं। Likhne ko mai aaj koi unvaan dhoondta hu Kalam me apni khuda ...